उत्कर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि0) द्वारा एक राम नाम बैंक की स्थापना की गई है। इस राम नाम बैंक का उद्देश्य है राम नाम लेखन करने वाले भक्तगणों को निशुल्क राम नाम लेखन पुस्तिका उपलब्ध कराना।
उत्कर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि0) देश में एक मात्र ऐसा ट्रस्ट है। जो राम नाम लेखन पुस्तिका निशुल्क उपलब्ध कराता है राम नाम लेखन करने वाले भक्तगणों को। राम राम लेखन पुस्तिका का विमोचन विश्व प्रसिद्ध श्री हनुमान धाम रामनगर उत्तराखंड के संस्थापक आचार्य विजय श्री के हाथों से श्री हनुमान धाम रामनगर उत्तराखंड में हुआ है। इस मौके पर उत्कर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक मुकेश कमार कश्यप अध्यक्ष नेहा कश्यप कोषाध्यक्ष पलक कश्यप उपस्थित रही।
भगवान राम की शरण में आने वाले प्रत्येक मनुष्य का कल्याण निश्चित है। धर्म और परंपराओं में भगवान राम के लिए गहरी आस्था छुपी हुई है। कहा जाता है राम से भी बड़ा है। राम का नाम। राम नाम जप के साथ जो साधना करते हैं, वह कई गुना अधिक लाभदायक हो जाते हैं। परन्तु राम नाम के बिना जो साधना होती हैं वह किसी भी तरह का फल प्रदान नहीं करती।
हृदय में निर्गुण ब्रह्मा का थ्यान नेत्रों के सम्मुख स्वरूप की सुंदर झांकी और जीभ से प्रभु का सुंदर नाम राम नाम का जप करना ऐसा है। मानो सोने की सुंदर डिबिया में मनोहर रत्न सुभोभित हो।राम नाम निर्गुण ब्रह्मा और सगुण भगवान दोनों से बड़ा है।राम नाम का चमत्कारी मंत्र है साधारण सा दिखने वाला यह मंत्र चर्चा का नहीं अनुभव का विषय है।
यू तो राम नाम से अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष दोनों रूप से फल मिलता हैं। पर यहां हम प्रत्यक्ष रूप से मिलने वाले फलों के बारे में चर्चा करेंगे।
(1) राम नाम का सहारा लेने से जीवन की समस्त बाधाओं से मुक्ति मिलती हैं।
(2) राम नाम के लेखन में काल स्थान की बंदिश नहीं होती कोई भी बिना भेदभाव के राम नाम लिखकर पुण्य कमा सकता है। मंगलवार से राम राम लिखने की शुरुआत करने से बड़े ही शुभ मंगलकारी परिणाम मिलते है। पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप राम नाम लिखने का चमत्कारी लाभ भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था ताकि वह अपना छीना राज्य फिर से पाने की चाहत पूरी कर सके।
(3) राम नाम का जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
(6) रामायण में तुलसी दास जी कहते है कि 6 मास तक दूध का आहार ग्रहण करने से अथवा केवल फल खाकर राम नाम का जाप करने से समस्त सिद्धियां अपने आप ही मिल जाती हैं।
(7) जीवन सौभाग्य और दुर्भाग्य की अनुभूतियों से भरा हुआ है। दुर्भाग्य को दूर करने के लिए नित्य राम नाम का जाप करने से पुण्य तथा सौभाग्य का सृजन होने लगता हैं।
(8) भगवान श्री रामचंद्र जी का नाम इस कलियुग में कल्पवृक्ष अर्थात मनचाहा फल प्रदान करने वाला है। राम नाम के लेखन मात्र से सभी दुखों से मुक्ति मिलती हैं।
(9) राम नाम के जाप से मोक्ष केआधार साक्षात भगवान की प्राप्ति होती है।
(10) प्रेम विश्वास और विधि के साथ दुष्ट प्रवृत्तियो से दूर रहते हुए राम नाम जपने से आदि मध्य और अंत तीनों ही कालों में कल्याण होता है।
राम नाम की महिमा
अविनाशी है राम और जीवन का आधार हैं राम का नाम
84 लाख योनियों के बाद यह मनुष्य जन्म मिलता हैं और इस मनुष्य जीवन को व्यर्थ गंवाने से पुनः इसी 84 लाख योनियों में भटकना पड़ता हैं। अतः इस चक्र में फसने से बचने के लिए अपने आप को राम के चरणों में समर्पित कर देना ही बेहतर है। भगवान राम की सेवा में किया गया प्रत्येक कार्य आपको एक योनि से मुक्ति दिलाता है। राम बारात में शामिल होना और उसके लिए प्रत्येक कदम चलने से आपको प्रत्येक योनि से मुक्ति मिलती हैं।
राम नाम की महिमा 1
जीभ बागेंद्रीन्य है राम राम नाम जपने से उसमें आलोकिकता आ जाती हैं।इसके प्रभाव से ज्ञानेंद्रिय अंतकरण प्रवृत्ति और आपका सूक्षम शरीर भी अलौकिक हो जाता हैं।
राम नाम की महिमा 2
राम नाम मणि दीप हैं। एक दीपक होता है और एक मणिदीप । तेल का दिया दीपक कहलाता हैं जबकि मणिदीप स्वयं प्रकाशित होती है वह कभी बुझती नहीं है।जैसे दीपक को चौखट पर रख देने से घर के अंदर और बाहर दोनों हिस्से प्रकाशित हो जाते हैं। वैसे ही राम नाम को जीभ पर रखने से अंतकरण और बाहरी आचरण दोनों प्रकाशित हो जाते हैं।
राम नाम की महिमा 3
भक्ति को यदि हृदय से बुलाना हो तो राम नाम का जाप करो भक्ति दौड़ी चली आती हैं ।
राम नाम की महिमा 4
राम के के दोनों अक्षर मधुर और सुंदर हैं। मधुर का अर्थ रचना में रस मिलाता हुआ और मनोहर कहने का अर्थ हैं कि मन को अपनी और खींचता हुआ राम राम कहने से मुंह में मिठास पैदा होती है और दोनों अक्षर वर्णमाला की दो आंखे हैं राम के बिना वर्णमाला भी अधूरी हैं।
राम नाम की महिमा 5
जगत में सूर्य पोषण करता है और चंद्रमा अमृत वर्षा करता है। सूर्य और चंद्रमा को राहु केतु ग्रहण लगा देते हैं। लेकिन राम नाम पर कभी ग्रहण नहीं लगता हैं राम नाम विमल है। चंद्रमा घटता बढ़ता रहता है। लेकिन राम तो सदैव बढ़ता रहता है यह सदा शुद्ध हैं। अंत यह निर्मल चंद्रमा और तेजस्वी सूर्य के समान है।














